Affirmation - An Overview






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सुमति का सर दर्द अब और बढ़ता ही जा रहा था. न जाने कितने नयी यादें उसकी आँखों के सामने दौड़ने लगी थी. उसका सर चकरा रहा था. और उस वक़्त उसके हाथों से उसकी साड़ी छुट कर निचे गिर गयी. उसने अपने सर को एक हाथ से पकड़ कर संभालने की कोशिश की. पर सुमति अब खुद को संभाल न सकी और वो बस निचे गिरने ही वाली थी. कि तभी चैतन्य ने दौड़कर उसे सही समय पर पकड़ लिया. सुमति अब चैतन्य की मजबूत बांहों में थी. उसके खुले लम्बे बाल अभी फर्श को छू रहे थे. और सुमति की आँखों के सामने उसके होने वाले पति का चेहरा था. चैतन्य की बड़ी बड़ी आँखें, उसके मोटे डार्क होंठ और हलकी सी दाढ़ी.. सुमति अपने होने वाले पति की बांहों में उसे इतने करीब से देख रही थी. और चैतन्य मुस्कुराते हुए सुमति को बेहद प्यार से सुमति की कमर पर एक हाथ रखे पकडे हुए थे, वहीँ उसका दूसरा हाथ सुमति की पीठ को छू रहा था.

उसके नाज़ुक कोमल स्तन, उसका फिगर, उसकी नाभि और जांघें, वो सबको छूकर महसूस करना चाहती थी.

इंदूमति ने संभलकर जवाब दिया—तुम अपने दिल में इस वक्त जो ख्याल कर रहे हो उसे एक पल के लिए भी वहां न रहने दो , वर्ना समझ लो कि आज ही इस जिंदगी का खात्मा है। मुझे नहीं मालूम था कि तुम मेरे ऊपर जो जुल्म किए हैं उन्हें मैंने किस तरह झेला है और अब भी सब-कुछ झेलने के लिए तैयार हूँ। मेरा सर तुम्हारे पैंरो पर है, जिस तरह रखोगे, रहूँगी। लेकिन आज मुझे मालूम हुआ कि तुम खुद हो वैसा ही दूसरों को समझते हो। मुझसे भूल अवश्य हुई है लेकिन उस भूल की यह सजा नहीं कि तुम मुझ पर ऐसे संदेह न करो। मैंने उस औरत की बातों में आकर अपने सारे घर का चिट्ठा बयान कर दिया। मैं समझती थी कि मुझे ऐसा नहीं करना चाहिये लेकिन कुछ तो उस औरत की हमदर्दी और कुछ मेरे अंदर सुलगती हुई आग ने मुझसे यह भूल read more करवाई और इसके लिए तुम जो सजा दो वह मेरे सर-आंखों पर।

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A modern experiment by a staff from Israel scores details from this posture. Ran Hassin and colleagues applied a neat visual trick known as Ongoing Flash Suppression to put data into individuals’ minds without having them starting to be consciously aware of it. It might sound distressing, but in reality it’s essentially really straightforward. The procedure can take advantage of the fact that Now we have two eyes and our Mind commonly makes an attempt to fuse the two resulting illustrations or photos into only one coherent perspective of the whole world.

सुमति को ज़रा भी अंदाजा नहीं था कि कोई उसके कमरे में यूँ चल कर आ सकता है जब वो तैयार हो रही हो. आखिर तमीज़ भी कोई चीज़ होती है. उसने तो अपने ब्लाउज को भी अपनी साड़ी के आँचल से अब तक ढंका नहीं था. वो तो अब तक अपनी कमर के निचे प्लेट ही बना रही थी. उसने झट से अपनी साड़ी को दोनों हाथों से पकड़ा और तुरंत here उससे अपने सीने को छुपाने लगी. ठीक वैसे ही जैसे कोई भी औरत करेगी यदि कोई अनजान आदमी उसके कमरे में घुसा चला आये.

महाराजा साहब ने उसकी तरफ़ आश्चर्य से देखा और बोले—यह कौन औरत है? सब लोग मेरी ओर प्रश्न-भरी आंखों से देखने लगे और मुझे भी उस वक्त यही ठीक मालूम हुआ कि इसका जवाब मैं ही दूं वर्ना फूलमती न जाने क्या आफत ढ़ा दे। लापरवाही के अंदाज से बोला—इसी बाग के माली की लड़की है, यहां फूल तोड़ने आयी होगी। फूलमती लज्जा और भय के मारे जमीन में धंसी जाती थी। महाराजा साहब ने उसे सर से पांव तक गौर से देखा और तब संदेहशील भाव से मेरी तरफ देखकर बोले—यह माली की लड़की है?

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मधु की बात सुनकर अंजलि जोर जोर से हँसने लगी. तो सुमति भी अपनी जगह से उठकर मधु के पीछे आकर सोफे पर बैठ गयी और मधु को पीछे से गले लगाती हुए बोली, “माँ, यदि मैं तुमसे तुम्हारी तरह एक चीज़ पाना चाहूंगी तो वो है तुम्हारे बड़े बड़े बूब्स!

मधुरिमा की पत्नी अजंता भी तो सुमति को अपनी बेटी की तरह get more info रखते थे. सुमति को आज भी याद आता है कि कैसे अजंता आंटी कहती थी कि उन्हें तो सुमति की तरह बहु चाहिए. शायद मधु और अजंता के साथ का अनुभव था जो आज सुमति सहज रूप से अपने सास-ससुर के सामने थी.

“मैं जानती हूँ कि मेरी सहेली है ही इतनी खुबसूरत कि हर कोई उसे देखना चाह रहा होगा. पर आज शायद इस लाल रंग की ब्रा का भी कमाल होगा जिसका स्ट्रेप तेरे ब्लाउज से निकल कर दिख रहा है”, सुमति भी हँसने लगी.

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